भारत का ऑटोमोबाइल उद्योग अब केवल वाहनों के उत्पादन तक सीमित नहीं रहना चाहता। उद्योग जगत का मानना है कि भविष्य में सफलता के लिए आधुनिक तकनीक पर नियंत्रण बेहद जरूरी होगा।
सेमीकंडक्टर, बैटरी सेल, पावर इलेक्ट्रॉनिक्स और एडवांस इलेक्ट्रॉनिक सिस्टम जैसी तकनीकों के लिए भारत अभी भी काफी हद तक आयात पर निर्भर है।
केवल मैन्युफैक्चरिंग पर्याप्त नहीं
भारत आज दुनिया के प्रमुख ऑटोमोबाइल मैन्युफैक्चरिंग देशों में शामिल है। लेकिन विशेषज्ञों का कहना है कि केवल वाहन असेंबल करना भविष्य की जरूरतों के लिए पर्याप्त नहीं होगा।
भविष्य के वाहन इलेक्ट्रिक, कनेक्टेड और सॉफ्टवेयर आधारित होंगे।
इसलिए भारत को महत्वपूर्ण तकनीकों के डिजाइन, रिसर्च और उत्पादन में भी मजबूत बनना होगा।
सप्लाई चेन जोखिम कम करने की जरूरत
आयात पर अधिक निर्भरता वैश्विक संकट के दौरान बड़ी समस्या बन सकती है।
सेमीकंडक्टर संकट के दौरान दुनिया भर की ऑटोमोबाइल कंपनियों को उत्पादन रोकना पड़ा था क्योंकि जरूरी चिप्स की कमी हो गई थी।
इसी अनुभव से भारत के उद्योग जगत को यह समझ आया है कि महत्वपूर्ण तकनीकों में आत्मनिर्भरता जरूरी है।
ऑटो उद्योग अब रिसर्च, टेक्नोलॉजी पार्टनरशिप और घरेलू मैन्युफैक्चरिंग में अधिक निवेश की मांग कर रहा है।
लक्ष्य केवल भारत को ऑटोमोबाइल निर्माण का केंद्र बनाना नहीं बल्कि भविष्य की ऑटोमोबाइल टेक्नोलॉजी का भी प्रमुख केंद्र बनाना है।
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