नई दिल्ली: देश की लोकतांत्रिक व्यवस्था को आधुनिक युग की प्राथमिकताओं के अनुरूप ढालने और मतदान प्रणाली को अधिक पारदर्शी बनाने के उद्देश्य से संसद भवन परिसर में एक विशेष उच्चस्तरीय विमर्श आयोजित किया गया। इस सत्र में नीति निर्माण से जुड़े विशेषज्ञों, प्रशासनिक अधिकारियों और विधिक सलाहकारों ने भाग लेकर चुनावी सुधारों के विभिन्न पहलुओं की समीक्षा की।
बैठक के दौरान मुख्य रूप से दूरदराज के क्षेत्रों में रहने वाले नागरिकों और प्रवासी मतदाताओं के लिए डिजिटल तकनीकों के सुरक्षित उपयोग पर चर्चा की गई। तकनीकी विशेषज्ञों ने डेटा गोपनीयता, साइबर सुरक्षा और मतदाता सत्यापन की आधुनिक पद्धतियों का प्रारूप पेश किया। इसके साथ ही, चुनाव प्रक्रिया में आम जनमानस की भागीदारी बढ़ाने और युवा मतदाताओं को जागरूक करने के लिए व्यापक डिजिटल अभियानों की रूपरेखा तैयार की गई।
विशेषज्ञों ने माना कि निष्पक्ष एवं पारदर्शी चुनाव लोकतंत्र की रीढ़ हैं और इसमें किसी भी नए तकनीकी बदलाव को अत्यंत सतर्कता और सभी हितधारकों की सर्वसम्मति के बाद ही लागू किया जाना चाहिए। विमर्श के अंत में सुधारों से संबंधित एक विस्तृत मसौदा रिपोर्ट तैयार करने का निर्णय लिया गया, जिसे आगामी संसदीय सत्र से पूर्व समीक्षा के लिए प्रस्तुत किया जाएगा।
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